गोदरेज की ईजी हग्स पहल के तहत लखनऊ के वंचित बच्चों को कड़ाके की सर्दी के दौरान नए ऊनी वस्त्रों का वितरण

लखनऊ(लाइवभारत24)। मौजूदा दौर में चल रहे सर्द मौसम के दौरान शहर के वंचित तबके के बच्चों को कड़ाके की सर्दी से बचाने की अपनी कोशिशों के तहत लिक्विड डिटर्जेंट ब्रांड गोदरेज ईजी ने ऊनी वस्त्रों का वितरण किया। इन वस्त्रों का वितरण गोदरेज ईजी के सीएसआर कार्यक्रम – ईजी हग्स के तहत किया गया। गोदरेज की यह पहल पिछले 11 वर्षों से चल रही है और इसका उद्देश्य भीषण सर्दियों के दौरान वंचित बच्चों को गर्म वस्त्र उपलब्ध कराना है। इस वर्ष गोदरेज ईजी ने अपनी तरह की इस अनूठी पहल के लिए भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के साथ भागीदारी की। आईएमडी ने गोदरेज ईजी को लखनऊ, इलाहाबाद, दिल्ली, पंचकुला और कोलकाता में कड़ाके की सर्दी के बारे में पूर्वानुमान बताए और मार्गदर्शन प्रदान किया। यह सुनिश्चित किया गया कि इस पूर्वानुमान के आधार पर ईजी हग्स ज्यादा से ज्यादा ऐसे इलाकों में पहुंचे, जहां सर्दी का प्रकोप अत्यधिक है। एक बार सही स्थानों का पता लगाने के बाद गोदरेज ईजी ने अपने ईजी हग्स अभियान की भागीदार संस्था चाइल्ड राइट्स एंड यू- क्राई के साथ मिलकर उन क्षेत्रों में रहने वाले अभावग्रस्त बच्चों तक नए ऊनी स्वेटर इत्यादि पहुंचाए। चिनहट और लखीमपुर खीरी जैसे क्षेत्रों में वंचित वर्ग के बच्चों को 1500 स्वेटर प्रदान किए गए। लखनऊ के साथ ईजी हग्स दिल्ली, इलाहाबाद, पंचकुला और कोलकाता जैसे शहरों को भी कवर करेगा। ईजी हग्स ने इस साल 5 शहरों में कुल 25,000 स्वेटर प्रदान करके कम उम्र के बच्चों को कड़ाके की सर्दियों से बचाने की अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की है। साझेदारी और पहल के बारे में बात करते हुए गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स लिमिटेड के चीफ एक्जीक्यूटिव आॅफिसर-इंडिया एंड सार्क श्री सुनील कटारिया ने कहा, ‘‘सर्दियों में खास तौर पर उन लोगों को मुश्किलें आती हैं, जिनके पास खुद को सर्दियों से बचाने के कोई साधन नहीं हंै। 11 वें वर्ष में हमारे ईजी हग्स पहल को जारी रखते हुए, इस बार आईएमडी और क्राई के सहयोग से, हम कड़ाके की सर्दी में रहने वाले हजारों वंचित बच्चों को सर्दियांे से बचाने के इंतजाम उपलब्ध कराना चाहते थे। यह पहल देखभाल और आराम प्रदान करने से संबंधित हमारी फिलाॅस्फी के अनुरूप है। इस तरह की पहल से जुड़ना हमारे लिए बेहद सुकून भरा काम है और इस तरह हम जमीनी स्तर पर कुछ सामाजिक चिंताओं को दूर करने का प्रयास कर सकते हैं।’

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