लखनऊ(लाइवभारत24)। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा है कि भाजपा राज में अराजकता को खुली छूट मिली हुई है। लूट, अपहरण, बलात्कार की शर्मनाक घटनाओं के साथ गरीबों के घरों पर राक्षसी बुलडोजर कहर ढा रहा है। किसानों को जीप से रौंदा जा रहा है। महिलाओं और मासूम बच्चियों के लिए उत्तर प्रदेश सर्वाधिक असुरक्षित प्रांत हो गया है। गृह मंत्रालय ही पदमुक्त अकर्मण्य डीजीपी का चयनकर्ता था। वहीं सबसे ज्यादा अव्यवस्था है। भाजपा सरकार के वसूलीतंत्र ने समूची पुलिस व्यवस्था को कलंकित कर रखा है। कानपुर की चकेरी पुलिस के बाद अर्मापुर पुलिस की कथित वसूली की फिक्स रेट लिस्ट की चर्चा सोशल मीडिया पर वायरल हुई है। उत्तर प्रदेश में दबिश के नाम पर पुलिस घरों में घुस कर महिलाओं से अभद्रता के मामले में नया इतिहास रच रही है। प्रयागराज में न्याय और सुरक्षा को ठोकर मार कर पुलिस ने जातीय वैमनस्यता में महिलाओं से मारपीट की। पुलिस थानों में रेप हो रहा है। मासूम बच्चियों तक को दुष्कर्म का शिकार बनाया जा रहा है। बांदा में 5 साल, बुलन्द शहर में 8 साल, सीतापुर में 10 साल और प्रयागराज में 13 साल की बच्ची से रेप की शर्मनाक घटनाएं घटी हैं। भाजपा राज में लखीमपुर में किसानों पर जीप चढ़ा कर उनकी हत्या कर दी जाती है। आरोपित मंत्री जी बेफिक्र घूम रहे है। अतिक्रमण हटाने के अभियान में गुमटी बुलडोज हुई और दूकानदार बुरी तरह घायल हो गया। बुलन्दशहर में गरीब घर पर बुलडोजर चलाने के दौरान मलबे में दबकर घायल व्यक्ति की मौत हो गई। गरीबों की रोजी-रोटी छीनी जा रही है। मिर्जापुर में गायब बेटी की खोज में पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई पिछले दिनों 82 मासूम लापता हुए 79 बच्चों को तलाशने में पुलिस नाकाम। केवल पोस्टर लगाकर बैठ जाती है पुलिस। दबिश के नाम पर पुलिस की दबंगई से एक और जान गई। सिद्धार्थनगर में पुलिस की गोली से महिला की मौत हुई। चंदौली में भी दबिश में गई पुलिस की दरिंदगी की शिकार एक किशोरी हुई। मुख्यमंत्री जी मिशन शक्ति की बात करते हैं और उनकी पुलिस अपराधीतत्वों को संरक्षण प्रदान करती है। कैसी विडम्बना है कि उत्तर प्रदेश में भाजपाई कभी रेप आरोपी को छुडवाने की पैरवी करते है और कभी छेड़छाड़ के आरोपी को छुड़ाने के लिए कोतवाली में हंगामा करते हैं। बड़ा सवाल यह है कि अपराधियों और भाजपाइयों की जुगलबंदी से बेटी कैसे बचाए? जनता की जिंदगी को अच्छे दिनों के नाम पर कब तक गुमराह किया जाता रहेगा?

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

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