ईडीआईआई के सालाना वी.जी. पटेल मैमोरियल लेक्चर के दौरान दिया सम्बोधन

लखनऊ(लाइवभारत24)। गुजरात के माननीय राज्यपाल  आचार्य देवव्रत जी ने दूसरा वीजी पटेल मैमोरियल व्याख्यान दिया, जिसका आयोजन आज भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान (ईडीआईआई) द्वारा किया गया था। व्याख्यान की दूसरी श्रृंखला का आयोजन वर्चुअल तरीके से किया गया, जिसमें ‘प्राकृतिक खेती में उद्यमिता के अवसरों’ पर ध्यान केन्द्रित किया गया। इस अवसर पर माननीय अतिथि प्रोफेसर अनिल गुप्ता, संस्थापक, हनी बी नेटवर्क, सृष्टि, ज्ञान एवं राष्ट्रीय नवप्रवर्तन संगठन; और डॉ सुनील शुक्ला, महानिदेशक, ईडीआईआई भी मौजूद थे।4 अप्रैल 2019 को ईडीआईआई के संस्थापक डॉ वी जी पटेल का असामयिक निधन हो गया। डॉ पटेल के महान कार्यों और व्यक्तित्व को सम्मानित करने के लिए संस्थान ने सालाना व्याख्यान की यह श्रृंखला शुरू की है। उद्यमिता समुदाय द्वारा ‘उद्यमिता आंदोलन के जनक’ के रूप में विख्यात डॉ वी.जी. पटेल खुद उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध थे। उन्होंने न केवल भारत में उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए अथक प्रयास किया बल्कि 1983 में राष्ट्रीय संसाधन संस्थान, ईडीआईआई की स्थापना भी की।वर्चुअल सत्र के दौरान कृषि एवं प्राकृतिक कृषि में उद्यमिता के अवसरों पर रोशनी डालते हुए गुजरात के माननीय राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत जी ने बताया कि हमारी तकरीबन 70 फीसदी आबादी गांवों में रहती है और कृषि पर निर्भर है। ऐसे में ज़रूरी है कि हम इस क्षेत्र को गंभीरता से लें। यह संस्थान हर तरीके से प्राकृतिक कृषि को प्रोत्साहित करता है, ताकि किसान कमर्शियल खेती की ओर रूख कर सकें। उन्होंने कहा, ‘‘सेहतमंद जीवनशैली और पर्यावरण संरक्षण से जुड़ी सभी चर्चाओं के बीच, कृषि की यह शाखा- प्राकृतिक कृषि तेज़ी से लोकप्रिय हो रही है। इसका मुख्य कारण यह है कि इसके कारण पर्यावरण को कम से कम नुकसान पहुंचता है, इस प्रकार की खेती में उत्पन्न होने वाला उत्पाद सेहत के लिए फायदेमंद होता है। मेरा मानना है कि किसानों को प्राकृतिक खेती के बारे में शिक्षित करना बेहद ज़रूरी है, इससे वे खेती के स्थायी पूंजीकरण को सुनिश्चित कर सकेंगे। गुजरात ने प्राकृतिक कृषि पर ध्यान केन्द्रित करते हुए खेती के क्षेत्र में सराहनीय प्रगति की है।’’

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