15 राज्यों में अब तक ब्लैक फंगस के 9320 मामले, 235 मौतें; सबसे ज्यादा 5000 केस गुजरात में 

नई दिल्ली (लाइवभारत24)। देश में म्यूकर माइकोसिस यानी ब्लैक फंगस खतरनाक होता जा रहा है। गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश और उत्तर प्रदेश समेत 15 राज्यों में ही अब तक ब्लैक फंगस के 9,320 मामले सामने आ चुके हैं। वहीं 235 लोगों की मौत हो चुकी है। सबसे ज्यादा 5000 हजार मामले तो अकेले गुजरात में ही सामने आए हैं। इस संक्रमण के चलते कुछ मरीजों की आंख तक निकालनी पड़ रही है।

ब्लैक फंगस को हरियाणा ने सबसे पहले महामारी घोषित किया था। उसके बाद राजस्थान ने भी इस संक्रमण को महामारी एक्ट में शामिल कर लिया। फिर केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों के कहा कि ब्लैक फंगस को पेन्डेमिक एक्ट के तहत नोटिफाई किया जाए। इसके बाद उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, चंडीगढ़, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, कर्नाटक, तेलांगना और तमिलनाडु भी ब्लैक संक्रमण को महामारी घोषित कर चुके हैं।

गुजरात में पहली बार 15 साल के किशोर को ब्लैग फंगस हुआ
अहमदाबाद में कोरोना से उबरे 15 साल के किशोर में ब्लैक फंगस का संक्रमण मिला है। उसका ऑपरेशन करना पड़ा। 4 घंटे चले ऑपरेशन के बाद किशोर संक्रमण मुक्त हो गया। डॉ. अभिषेक बंसल ने बताया कि राज्य में किसी किशोर में म्यूकर माइकोसिस का यह पहला केस है। ऑपरेशन से उसके तालू और साइड के दांत निकालने पड़े।
देश के कई राज्यों में ब्लैक फंगस के केस सामने आए हैं। हालांकि, यह संक्रमण शुगर के मरीजों में ज्यादा देखा जा रहा है। इसी को लेकर दिल्ली एम्स के निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया और मेदांता अस्पताल के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने शुक्रवार को कई अहम जानकारियां दीं।

डॉ. गुलेरिया ने कहा कि ब्लैक फंगस से बचाव के लिए कुछ बातों का विशेष ध्यान रखना चाहिए। मरीजों को डॉक्टर्स की सलाह पर ही स्टेरॉयड दिया जाना चाहिए। साथ ही स्टेरॉयड की हल्की और मीडियम डोज ही देनी चाहिए। अगर कोई लंबे समय से स्टेरॉयड ले रहा है, तो डायबिटीज जैसी समस्या आ सकती है। ऐसे में फंगल इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है।
मेदांता के चेयरमैन डॉ. नरेश त्रेहन ने बताया कि नाक में दर्द, जकड़न, गाल पर सूजन, मुंह के अंदर फंगस पैच, आंख की पलक में सूजन, आंख में दर्द या रोशनी कम होना और चेहरे के किसी भाग पर सूजन जैसे लक्षण आते हैं, तो तुरंत ट्रीटमेंट की जरूरत होती है। उन्होंने कहा कि ब्लैक फंगस को काबू करने का एक ही रास्ता है, स्टेरॉयड का सही तरीके से इस्तेमाल करें और डायबिटीज को कंट्रोल में रखें।

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