यूपीएल ने 4 राज्यों के 8 अस्पतालों में स्थापित किए ऑक्सीजन संयंत्र

नई दिल्ली(लाइवभारत24)। टिकाऊ कृषि समाधान की वैश्विक प्रदाता कंपनी यूपीएल ने आज घोषणा की कि उसने ऑक्सीजन उत्पन्न करने के लिए गुजरात, मध्य प्रदेश, यूपी और नई दिल्ली के आठ अस्पतालों में संयंत्र स्थापित किए हैं। कोविड के मामलों में वृद्धि के कारण आॅक्सीजन की देशव्यापी कमी का जवाब देते हुए कंपनी ने तेजी से इनोवेशन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया और गुजरात में अपने चार नाइट्रोजन उत्पादन संयंत्रों को आॅक्सीजन प्लांट में परिवर्तित कर दिया। अब इन प्लांट्स से गुजरात और उत्तर प्रदेश के चार अस्पतालों में ऑक्सीजन का उत्पादन और वितरण किया जाएगा। इन संयंत्रों को ‘स्किड माउंटेड’ किया जाता है और आपूर्ति में आत्मनिर्भरता प्राप्त करने में मदद करने के लिए अस्पताल के ऑक्सीजन हेडर सिस्टम में प्लग किए जाने के लिए उन्हें सीधे अस्पताल की साइटों पर पहुंचाया जाता है। इन परिवर्तित संयंत्रों को जिन अस्पतालों में स्थापित और चालू किया गया है, उनमें प्रमुख अस्पताल इस प्रकार हैं- चैकाघाट, वाराणसी में सरकारी आयुर्वेदिक कॉलेज, वापी में हरिया एल जी रोटरी अस्पताल, अंकलेश्वर में जयाबेन अस्पताल और जम्बूसर, भरूच में सरकारी अस्पताल। इसके अलावा, यूपीएल ने मैक्स अस्पताल, पटपड़गंज, नई दिल्ली में एक डायरेक्ट ऑक्सीजन प्लांट भी स्थापित किया है और कंपनी इंदौर, ग्वालियर और वाराणसी में अतिरिक्त तीन ऑक्सीजन संयंत्र उपलब्ध कराने की प्रक्रिया में है। ये सभी आठ ऑक्सीजन प्लांट एक साथ 1,000 बिस्तरों पर आॅक्सीजन की सप्लाई करेंगे। यूपीएल ने गुजरात, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में स्थानीय मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर, कोविड दवा किट की भी आपूर्ति की है। यूपीएल ने ऑक्सीजन पैदा करने के लिए औद्योगिक नाइट्रोजन संयंत्र को परिवर्तित करके बढ़ती मांग को पूरा करने में मदद करने का दायित्व उठाया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) द्वारा गठित टास्क फोर्स के साथ काम करते हुए परिवर्तन संबंधी इस अनुभव को उद्योग के ऐसे सदस्यों के साथ साझा किया गया था, जो अपने नाइट्रोजन संयंत्रों को ऑक्सीजन पैदा करने वाले संयंत्र में परिवर्तित करने के इच्छुक थे। कंपनी ने इस बात पर खुशी जाहिर की है कि टास्क फोर्स टीम के एक हिस्से के रूप में कंपनी ने लगभग 100 उद्योग सदस्यों को इस नेक काम को अंजाम देने के लिए आगे आने में प्रोत्साहित करने और शिक्षित करने में सफलता हासिल की है।

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