संगीत हमारी संस्कृति का आत्म तत्व: डा. नीलकण्ठ तिवारी

संगीत नाटक अकादमी में ऑनलाइन कथक कार्यशाला का समापन

लखनऊ (लाइवभारत24)। संगीत हमारी संस्कृति का आत्म तत्व है। यजुर्वेद में नृत्य को व्यायाम के रूप में लिया गया है। नृत्य के अभ्यास से शरीर अंग तो खुलते ही हैंए शरीर निरोगी रहता है। उम्र बढ़ती है, मानसिक, शारीरिक तनाव दूर होते हैं। आज सारा विश्व भारतीय योग व्यायाम के पीछे भाग रहा है। उक्त उद्गार संस्कृति संस्कृति मंत्री डा नीलकण्ठ तिवारी ने मंगलवार को प्रदेश संगीत नाटक अकादमी सभागार में अकादमी कथक केन्द्र द्वारा संचालित कथक कार्यशाला के समापन अवसर पर व्यक्त किये। इस अवसर पर प्रमुख सचिव संस्कृति जितेन्द्र कुमार, अकादमी की अध्यक्ष डा पूर्णिमा पाण्डेय व सचिव तरुणराज भी उपस्थित थे। अकादमी द्वारा संचालित लोकसंगीत व रूपसज्जा कार्यशाला के बाद आज अकादमी कथक केन्द्र की पहली जून से चल रही कथक कार्यशाला का समापन आज प्रतिभागियों की सीखे प्रदर्शन को बड़ी टीवी स्क्रीन पर संस्कृति मंत्री के अवलोकन के उपरांत हो गया। एक महीने की यह नि:शुल्क कार्यशाला कोविड 19 के कारण ऑनलाइन थी। इसमें बहरीन और कैलिफोर्निया के प्रतिभागियों समेत चार सौ से ज्यादा प्रतिभागियों ने छह बैचों में प्रशिक्षण प्राप्त किया। प्रतिभागियों को आशीर्वचन देने के साथ अकादमी की संयोजित ऑनलाइन कार्यशालाओं के संचालन के लिए अकादमी की सराहना करते हुए संस्कृति मंत्री ने कहा कि कोरोना काल में थम सी गयी गतिविधियों के मध्य प्रधानमंत्री और उनके प्रयासों को आगे बढ़ाते हुए मु यमंत्री योगी ने सार्थक कोशिशें की हैं। इसीे क्रम में हमें अकादमी के माध्यम से कुछ ऐसा करना था कि हम एक सकारात्मक दिशा में बढ़ें। अकादमी ने गीतए संगीत और नृत्य की विधाओं में कई कार्यशालाएं आयोजित की हैं। ऋग्वेद भरत मुनि के नाट्यशास्त्र इत्यादि की चर्चा करते हुए डा तिवारी ने कहा कि आज यहां प्रशिक्षिकाओं द्वारा आप सब को प्रशिक्षण देते देखते हुए बहुत प्रसन्नता हुई। इस सकारात्मक प्रयास में निश्चय ही आप लोगों से छोटे भाई बहनों या बड़ों ने भी सीखा होगा। सबसे बड़ी बात नृत्य के अ यास से श्वास रोकने की क्षमता बढ़ती है, जो कोविड 19 से लडऩे में सहायक मानी गई है। उन्होंने प्रतिभागियों और प्रशिक्षिकाओं से सवाल भी किए। इससे पहले 25 जून को डा तिवारी अकादमी की ऑलनाइन संचालित लोकसंगीत कार्यशाला के समापन अवसर पर भी प्रतिभागियों से रूबरू हुए थे।

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