योगी सरकार का अत्याचार, भ्रष्टाचार और अनाचार पर कोई नियंत्रण नहीं : अखिलेश 

लखनऊ(लाइवभारत24)। सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा है कि लगता नहीं है कि उत्तर प्रदेश में सरकार नाम की कोई संस्था भी है। सर्वजन विरोधी भाजपा सरकार में न किसान, न दलित, न सवर्ण, न पिछड़े, न अल्पसंख्यक, न नौजवान, न पत्रकार सुरक्षित हैं। सुरक्षित हैं तो सिर्फ सत्ताधीशों का विशेष वर्ग जिसे न कानून की परवाह है और नहीं लोकलाज की। प्रदेश में अत्याचार, भ्रष्टाचार और अनाचार पर कहीं कोई नियंत्रण नहीं। सरकार पर प्रदेश के हालात गिनाते हुए उन्होंने कहा कि जौनपुर में पुलिस की मौजूदगी में दलितों पर दबंगों ने गोलियां बरसाईं। लाठी-डंडो से पीटा। कासगंज में दबंगों ने रेप किया और पुलिसने पीड़िता के परिवारीजनों का ही उत्पीड़न किया। गाजियाबाद में कल रात पत्रकार पर बदमाशोंने हमला किया। दो दिन पहले उन्होंने अपने ऊपर हमले की आशंका जताते हुए पुलिस से शिकायतकी थी लेकिन पुलिस निष्क्रिय बनी रही। पत्रकार को गोली मार दी।
प्रदेश में कोरोना महामारी के प्रति भी राज्य की भाजपा सरकार गम्भीर नहीं है। संकट के इन दिनों में भी 20 दिन से ज्यादा हो गए चिकित्सा स्वास्थ्य का महानिदेशक पद खाली है। सरकार एक योग्य महानिदेशक का चयन तक नहीं कर सकी है। जब विभाग में मुखिया ही नही है तो कामकाज कैसे चुस्त-दुरूस्त होगा?
स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली का तो अब योगी सरकार की टीम इलेवन के अफसरों को भी एहसास हो चला है। एम्बूलेंस सेवा हांफ रही है, अस्पतालोंमें डाॅक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी है, इन पदों पर भर्ती रूकी हुई है। संवेदना को झकझोर देने वाली एक तस्वीर देवरिया की है जहां एक मासूम बच्चे को स्ट्रेचर ढकेलनापड़ रहा है। इससे पूर्व भी कई ऐसे मामले सामने आ चुके हैं पर कहीं कोई सुधार के लक्षणनहीं दिख रहे हैं।
महाभ्रष्ट भाजपा सरकार के कार्यकाल में जनतापर चौतरफा मार पड़ रही है। मंहगाई, बीमारी और सरकारी उदासीनता ने जिन्दगी दूभर कर दीहै। मुख्यमंत्री  को नए-नए आदेश जारी करने के बजाय निष्पक्ष ढंग से हालात का जायजालेना चाहिए। केवल बयानबाजी से प्रदेश का भला होने वाला नहीं।
अखिलेश यादव ने मध्यप्रदेशके महामहिम राज्यपाल लालजी टण्डन के निधन पर गहरा दुःख व्यक्त किया है। उन्होंने टण्डन के निधन पर शोक व्यक्त करतेहुए कहा कि उनका सबके प्रति सम्मान का भाव रहता था। टण्डन जी के निधन से सार्वजनिकजीवन में रिक्तता रहेगी।

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