डीसीएम श्रीराम ने अपनी ‘मीठा सोना’ पहल के माध्यम से दो सालों में गन्ना किसानों को 299 बिलियन लीटर पानी बचाने में मदद की

लखनऊ (लाइवभारत24)। डीसीएम श्रीराम लिमिटेड- के चीनी कारोबार ने आज ऐलान किया कि इसने अपनी अनूठी गन्ना उत्पादन पहल/ बहु-हितधारक प्रोग्राम , ‘मीठा सोना’ के तहत पिछले दो सालों में गन्ना किसानों को 299 बिलियन लीटर पानी बचाने में मदद की है। कंपनी की यह पहल इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रीसर्च, लखनऊ द्वारा प्रमाणित है। डीसीएम श्रीराम लिमिटेड का चीनी कारोबार हरदोई और लखीमपुर खेड़ी ज़िलों के किसानों को पानी के प्रभावी उपयोग के लिए प्रशिक्षित करता रहा है। डीसीएम श्रीराम लिमिटेड- के चीनी कारोबार ने डीसीएम श्रीराम लिमिटेड की चीनी मिलों के कैचमेन्ट क्षेत्रों में गन्ना उत्पादन में सुधार लाने के लिए सोलिडेरिडेड एवं इंटरनेशनल फाइनैंस कॉर्पोरेशन के साथ साझेदारी की हैं कंपनी ने गन्ना किसानों को बेहतर कृषि प्रथाएं जैसे ट्राश श्रेडिंग, मल्चिंग, कम्पोस्टिंग, लेज़र लेवरिंग एवं ट्रैंच प्लांटिंग अपनाने में मदद की है- जिसके चलते किसान वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 के बीच 299 बिलियन लीटर पानी बचाने में सक्षम हुए हैं। ‘मीठा सोना’ प्रोजेक्ट ने 2250 गांवों के 225,000 गन्ना किसानों को कवर किया है और उन्हें जल-प्रभावी कृषि प्रथाओं पर प्रशिक्षित किया गया है। आईसीएआई से सम्बंधित सर्वोच्च गन्ना अनुसंधान संगठन- इंडियन इन्स्टीट्यूट ऑफ शुगरकेन रीसर्च, लखनऊ द्वारा प्रभाव मूल्यांकन किया गया। इससे पहले, 2016-2019 के बीच 275 बिलियन लीटर पानी की बचत की गई थी, इस तरह डीसीएम श्रीराम की चीनी फैक्टरियों के कैचमेन्ट क्षेत्रों में पिछले 5 सालों के दौरान कुल 574 बिलियन लीटर पानी की बचन की गई है। इस सकारात्मक प्रभाव के बारे में बात करते हुए श्री रोशन लाल तामक, कार्यकारी निदेशक एवं सीईओ- चीनी कारोबार- डीसीएम श्रीराम लिमिटेड ने कहा, ‘‘समाज के प्रति ज़िम्मेदार कंपनी होने के नाते हम किसानों को सर्वश्रेष्ठ कृषि प्रथाओं तथा उत्पादन के जल प्रभावी तरीकों पर शिक्षित करते हैं- इसी के चलते पिछले 2 सालों में हमने उन्हें 299 बिलियन लीटर पानी बचाने में सक्षम बनाया है, इससे पहले तीन सालों में भी हमने 275 बिलियन लीटर पानी बचाने में मदद की थी। इस सकारात्मक प्रभाव को देखकर हमंें बेहद खुशी का अनुभव हो रहा है और किसान भी अच्छी कृषि प्रथाओं के प्रशिक्षण से लाभान्वित हो रहे हैं।’’

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