पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी है इंदिरा एकादशी

लखनऊ (लाइवभारत24)। इंदिरा एकादशी को पितरों को मोक्ष प्रदान करने वाली एकादशी माना जाता है। आश्विन मास में कृष्ण पक्ष की एकादशी को इंदिरा एकादशी कहते हैं। इस व्रत को एकादशी को रखा जाता है और अगले दिन यानी द्वादशी तिथि को खोला जाता है। इंदिरा एकादशी का व्रत शुभ मुहूर्त में खोलते हैं। माना जाता है कि अगर पितरों को किसी कारणवश कष्ट उठाने पड़ रहे हैं तो इस व्रत के प्रभाव से उनके कष्ट दूर या कम हो जाते हैं।

जानिए इंदिरा एकादशी व्रत में किन बातों का रखना चाहिए ध्यान-

1. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी के दिन चावल का सेवन करना वर्जित होता है। ऐसा कहा जाता है कि एकादशी के दिन चावल सेवन करने वाले मनुष्य का जन्म रेंगने वाले जीव की योनि में होता है। इसके अलावा इस दिन व्रत न रखने वालों को भी चावल का सेवन नहीं करना चाहिए।

2. एकादशी के दिन ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष कृपा की प्राप्ति होती है।

3. एकादशी के दिन भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जाती है। माना जाता है कि इस दिन गुस्सा या झगड़े से दूर रहना चाहिए।

4. माना जाता है कि एकादशी के दिन महिलाओं का अपमान करने से व्रत के फल की प्राप्ति नहीं होती है। इसलिए इस दिन महिलाओं का अपमान नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि महिलाओं का अपमान करने वालों के कष्टों का सामना करना पड़ता है।

5. एकादशी के दिन मंदिरा-पान का सेवन नहीं करना चाहिए। कहते हैं कि एकादशी के दिन ऐसा करने से जीवन में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

इंदिरा एकादशी शुभ मुहूर्त-

एकादशी प्रारंभ: 13 सितंबर की सुबह 04 बजकर 13 मिनट पर।
एकादशी समाप्त: 14 सितंबर की सुबह 03 बजकर 16 मिनट तक।
पारण का समय: 14 सितंबर को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट से शाम 03 बजकर 27 मिनट तक।

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